Knowledge is everything

भाग्य का सम्बल

Availability: In stock

Rs60.00
OR
Book Pages 189
Publish Date 4-Feb-98
Author Name Gurudutt
Book Id 5382

Details

दमयन्ती अपने पति के दफ्तर लौटते समय घर की ड्योढ़ी में आ खड़ी हुआ करती थी। यह उसका नित्य का काम था। कभी उसके पति को लौटने में विलम्ब हो जाता तो उसे एक-एक घंटा-भर प्रतीक्षा करनी पड़ जाती थी। आस-पड़ोस की स्त्रियाँ उसको इस प्रकार किसी की प्रतीक्षा में खड़े देखकर मुस्कुराया करती थीं।

भाग्य का सम्बल

Double click on above image to view full picture

Zoom Out
Zoom In

More Views

Quick Overview

भाग्य अवसर प्रदान करता है परन्तु भाग्य स्वमेव लँगड़ा होता है।
पुरुषार्थ के बिना सफलता नहीं मिलती।
भाग्य हमारे अधीन नहीं, और पुरुषार्थ हमारे अधीन है। जब पुरुषार्थ और भाग्य दोनों अनकूल हो जाते हैं तो सफलता मिलती है।
Book Pages 189
Publish Date 4-Feb-98
Author Name Gurudutt
Book Id 5382

Details

दमयन्ती अपने पति के दफ्तर लौटते समय घर की ड्योढ़ी में आ खड़ी हुआ करती थी। यह उसका नित्य का काम था। कभी उसके पति को लौटने में विलम्ब हो जाता तो उसे एक-एक घंटा-भर प्रतीक्षा करनी पड़ जाती थी। आस-पड़ोस की स्त्रियाँ उसको इस प्रकार किसी की प्रतीक्षा में खड़े देखकर मुस्कुराया करती थीं।

Be the first to review this product