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बुद्धि बनाम बहुमत

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Rs30.00
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Book Pages 167
Publish Date March 02,2004
Author Name Gurudutt
Book Id 5419

Details

एक बार सुप्रसिद्ध नेता लाला लाजपतराय महात्मा गांधी का विरोध करने चल पड़े थे। यह सन् 1921 की बात है। कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन नागपुर में हो रहा था। इस अधिवेशन में गांधीजी न-मिलवर्तन का प्रस्ताव उपस्थित करने वाले थे। कांग्रेस के प्रायः नेता भी लालाजी के साथ गांधीजी के प्रस्ताव का विरोध करना चाहते थे।

बुद्धि बनाम बहुमत

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Quick Overview

श्री गुरुदत्त जी ने पिछले 60 वर्षों से देश की राजनीति का गम्भीर अध्ययन किया है और लगभग 15 वर्ष तक सक्रिय राजनीति में भाग लिया है। राजनीति के गहन अध्ययन का परिचय हमें उनकी रचनाओं में मिलता है।
आज देश की राजनीति कितनी ओछी हो चुकी है, यह पाठकों को बताने की आवश्यकता नहीं रही। समाचार-पत्र इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। और यह भी तथ्य है कि सभी राजनातिक दल इसमें दोषी हैं।
Book Pages 167
Publish Date March 02,2004
Author Name Gurudutt
Book Id 5419

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एक बार सुप्रसिद्ध नेता लाला लाजपतराय महात्मा गांधी का विरोध करने चल पड़े थे। यह सन् 1921 की बात है। कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन नागपुर में हो रहा था। इस अधिवेशन में गांधीजी न-मिलवर्तन का प्रस्ताव उपस्थित करने वाले थे। कांग्रेस के प्रायः नेता भी लालाजी के साथ गांधीजी के प्रस्ताव का विरोध करना चाहते थे।

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