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दो लहरों की टक्कर - भाग 1

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Rs250.00
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Book Pages 627
Publish Date 1-Jan-99
Author Name Gurudutt
Book Id 5375

Details

इन सात खण्डों में साधु-सन्त, महात्माओं और उनके चेलों के लिखे पत्र हैं, जो देश के धार्मिक नेता थे। उनका अविश्वास नहीं किया जा सकता था। इन प्रमाणों की उपस्थिति में सर वडरबर्न लिखते हैं— Hume felt that a safety valve must be provided for the suppressed discontentment of the masses and something must be done to relive their despair, if a disaster was to be averted……… (ह्यूम यह अनुभव करता था कि जनता में दबे हुए असन्तोष को निकलने का स्थान होना चाहिए। उनकी निराशा को दूर करने का कुछ यत्न करना चाहिए, जिससे भयंकर दुर्घटना होने से रोकी जा सके।)

दो लहरों की टक्कर - भाग 1

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Quick Overview

ए. ओ. ह्यूम सन् 1882 में जब सरकारी सेवा से मुक्त हुए तो अपने सेवा-काल में प्राप्त अनुभवों पर विचार करने लगे। उनका जीवन चरित्र लिखने वाले सर विलियम वडरबर्न उनके अनुभवों के विषय में इस प्रकार लिखते हैं—
‘सेवा-मुक्त होने से कुछ पहले ह्यूम के पास ऐसे प्रमाण एकत्रित हो गये थे कि जिनसे उसे विश्वास हो गया कि हिन्दुस्तानी में एक गम्भीर, स्थिति उत्पन्न हो चुकी है, जिसका अति भयंकर परिणाम निकल सकता है।’
Book Pages 627
Publish Date 1-Jan-99
Author Name Gurudutt
Book Id 5375

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इन सात खण्डों में साधु-सन्त, महात्माओं और उनके चेलों के लिखे पत्र हैं, जो देश के धार्मिक नेता थे। उनका अविश्वास नहीं किया जा सकता था। इन प्रमाणों की उपस्थिति में सर वडरबर्न लिखते हैं— Hume felt that a safety valve must be provided for the suppressed discontentment of the masses and something must be done to relive their despair, if a disaster was to be averted……… (ह्यूम यह अनुभव करता था कि जनता में दबे हुए असन्तोष को निकलने का स्थान होना चाहिए। उनकी निराशा को दूर करने का कुछ यत्न करना चाहिए, जिससे भयंकर दुर्घटना होने से रोकी जा सके।)

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