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दो लहरों की टक्कर - भाग 2

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Rs250.00
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Book Pages 644
Publish Date 1-Jan-99
Author Name Gurudutt
Book Id 5376

Details

पति ने उत्तर देने के स्थान पूछ लिया, ‘‘विजय घर आया है अथवा नहीं ?’’ ‘‘नहीं।’’ ‘‘और आनन्द ?’’ ‘‘वह आया था और यह कह चला गया है कि वह कलकत्ता जा रहा है। दो मास तक नहीं लौट सकेगा।’’ ‘‘कलकत्ता कौन-सी गाड़ी से गया है ?’’ ‘‘वह यहाँ बारह बजे के लगभग आया था। ताँगे में आया था और अपना सूटकेस ले, ताँगे में ही चला गया था।’’ पुरुष गम्भीर मुख बनाये विचार करने लगा। यह पुरुष था नलिनीकान्त, और उससे बात कर रही थी उसकी पत्नी सुवर्णा। ‘‘क्या हुआ है ?’’ सुवर्णा ने पति को चिन्तित देख पूछ लिया। ‘‘आज पुलिस ने लूट मचायी है। अनारकली बाजार की कई दुकानें लूट ली गयी हैं।’’

दो लहरों की टक्कर - भाग 2

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Quick Overview

लाहौर में पुरानी अनारकली से चौबुर्जी की ओर जाने वाली कपूरथला रोड और फिरोजपुर रोड के संगम पर एक बड़ी-सी कोठी के ड्रायंग-रूम में एक दम्पत्ति बैठे हुए वार्तालाप कर रहे थे। पति अभी बाजार से लौटा ही था। अप्रैल मास चल रहा था और सायंकाल लगभग छः बजे थे। अभी अन्धेरा नहीं हुआ था। पति जब कमरे में प्रविष्ट हुआ तो पत्नी ने पूछा, ‘‘बहुत देर कर दी आज ?’’
Book Pages 644
Publish Date 1-Jan-99
Author Name Gurudutt
Book Id 5376

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पति ने उत्तर देने के स्थान पूछ लिया, ‘‘विजय घर आया है अथवा नहीं ?’’ ‘‘नहीं।’’ ‘‘और आनन्द ?’’ ‘‘वह आया था और यह कह चला गया है कि वह कलकत्ता जा रहा है। दो मास तक नहीं लौट सकेगा।’’ ‘‘कलकत्ता कौन-सी गाड़ी से गया है ?’’ ‘‘वह यहाँ बारह बजे के लगभग आया था। ताँगे में आया था और अपना सूटकेस ले, ताँगे में ही चला गया था।’’ पुरुष गम्भीर मुख बनाये विचार करने लगा। यह पुरुष था नलिनीकान्त, और उससे बात कर रही थी उसकी पत्नी सुवर्णा। ‘‘क्या हुआ है ?’’ सुवर्णा ने पति को चिन्तित देख पूछ लिया। ‘‘आज पुलिस ने लूट मचायी है। अनारकली बाजार की कई दुकानें लूट ली गयी हैं।’’

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