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घर की बात

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Book Pages 169
Publish Date 4-Mar-04
Author Name Gurudutt
Book Id 5274

Details

साहित्य साधना का सफर इन्होंने ‘स्वाधीनता के पथ पर’ नामक उपन्यास से किया और इस उपन्यास के प्रकाशन ने इन्हें लाखों-करोड़ों पाठकों के हृदय का सम्राट बना दिया और ये यश व प्रसिद्धि की सीढ़ियाँ चढ़ते चले गये। इसके बाद श्री गुरूदत्त ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और राजनीति, समाज व इतिहास आदि पर अपनी कलम चलाते हुए एक के बाद एक, एक से बढ़कर एक लगभग 200 उपन्यासों का सृजन किया। इसी प्रकार आजीवन साहित्य साधना में रत रहते हुए 8 अप्रैल 1989 को इन्होंने दिल्ली में अपना शरीर त्याग दिया और अपना सारा साहित्य भारत भूमि को समर्पित कर दिया।

घर की बात

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Quick Overview

आजीवन साहित्य साधना में लीन रहने वाले गुरूदत्त का नाम अजर व अमर है; जिन्होंने अपने उत्कृष्ट साहित्य से अपना व भारत भूमि का नाम विदेशों में आलौकिक किया और भारत के यश व गौरव में वृद्धि की।
इनका जन्म लाहौर (वर्तमान पाकिस्तान) में सन् 1894 को हुआ था। तब लाहौर भारत का ही एक अंग था। ये आधुनिक विज्ञान के छात्र थे और पेशे से वैद्य थे। रसायन विज्ञान से एम.एस-सी. (स्नातकोत्तर) किया; किन्तु वैदिक साहित्य के व्याख्याता बने और साहित्य सृजन व साहित्य साधना में लग गये।
Book Pages 169
Publish Date 4-Mar-04
Author Name Gurudutt
Book Id 5274

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साहित्य साधना का सफर इन्होंने ‘स्वाधीनता के पथ पर’ नामक उपन्यास से किया और इस उपन्यास के प्रकाशन ने इन्हें लाखों-करोड़ों पाठकों के हृदय का सम्राट बना दिया और ये यश व प्रसिद्धि की सीढ़ियाँ चढ़ते चले गये। इसके बाद श्री गुरूदत्त ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और राजनीति, समाज व इतिहास आदि पर अपनी कलम चलाते हुए एक के बाद एक, एक से बढ़कर एक लगभग 200 उपन्यासों का सृजन किया। इसी प्रकार आजीवन साहित्य साधना में रत रहते हुए 8 अप्रैल 1989 को इन्होंने दिल्ली में अपना शरीर त्याग दिया और अपना सारा साहित्य भारत भूमि को समर्पित कर दिया।

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