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  1. अस्ताचल की ओर

    अस्ताचल की ओर

    Rs500.00

    यह उपन्यास तीन भागों में हैं Learn More
  2. बनवासी Currently Under Print

    बनवासी Currently Under Print

    Rs0.00

    भारत का पूर्वांचल, अरुणोदय का प्रदेश, उसी प्रदेश के वन्य प्रान्तों में अनेक जन-जातियाँ निवास करती हैं। उनके अपने-अपने रीति-रिवाज हैं, परम्परायें हैं, प्रचलन हैं, पूजा अर्चना के विविध प्रकार हैं। सब कुछ उनका अलग ही हो, ऐसी बात भी नहीं है, अन्ततोगत्वा हैं तो वे भारतवासी ही। Learn More
  3. भाव और भावना

    भाव और भावना

    Rs75.00

    गुरुदत्त जी ने एक बार किसी गोष्ठी में कहा था-मैंने प्रत्येक समस्या को अपने लिये एक चुनौती माना है। ‘भाव और भावना’ उनके ऐसे संस्मरणों का संग्रह है। जिनसे उनके जीवन को दिशा मिली है। समस्याओं का विश्वलेषण कर उनका समाधान उन्होंने ढूंढ़ा है और अपना मार्ग प्रशस्त किया है। Learn More
  4. भगवान भरोसे Currently Under Print

    भगवान भरोसे Currently Under Print

    Rs0.00

    अमर लेखक श्री गुरुदत्त की एक सशक्त कृति पाठकों के लिए प्रस्तुत है। एक सफल लेखक समाज में हो रहे परिवर्तनों को न केवल अपने पात्रों के माध्यम से अत्यन्त रोचक तथा मनोरंजक ढंग से दर्शाता है, साथ ही नित्य उत्पन्न होने वाली नई समस्याओं का समाधान भी प्रस्तुत करता है। कुछ वास्तविक घटनाओं को काल्पनिक पात्रों में गूँथ कर एक रोचक उपन्यास पाठकों के समक्ष रखना सिद्ध करता है श्री गुरुदत्त एक सर्वकालीन लेखक हैं। Learn More
  5. भाग्य चक्र

    भाग्य चक्र

    Rs75.00

    जनवरी सन् 2000 में प्रकाशित ‘‘भाव और भावना’’ में श्री गुरुदत्त जी ने मुख्य-मुख्य राजनीतिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन घटनाओं का अपने मन पर प्रभाव तथा प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन घटनाओं ने किस प्रकार उन्हें राजनीतिक शिक्षा दी तथा किस प्रकार उनके जीवन को एक कर्मयोगी का जीवन बनाया, संस्मरणात्मक शैली में श्री गुरुदत्त जी ने स्पष्ट किया था। Learn More
  6. भाग्य का सम्बल

    भाग्य का सम्बल

    Rs60.00

    भाग्य अवसर प्रदान करता है परन्तु भाग्य स्वमेव लँगड़ा होता है। पुरुषार्थ के बिना सफलता नहीं मिलती। भाग्य हमारे अधीन नहीं, और पुरुषार्थ हमारे अधीन है। जब पुरुषार्थ और भाग्य दोनों अनकूल हो जाते हैं तो सफलता मिलती है। Learn More
  7. भैरवी चक्र

    भैरवी चक्र

    Rs250.00

    जीवात्मा कर्म करने में स्वतन्त्र है, परन्तु किये हुए कर्म का फल मिलना भी अवश्यम्भावी है। यह ईश्वरीय नियम है। जो राज्य नागरिकों के निजी जीवन को नियम में बाँधने का यत्न करते हैं, वे राज्य नहीं कहलाते। राज्य तो परमात्मा का स्वरूप होता है। जीवन को नियम में बाँधने वाले राज्य दारोगा कहे जा सकते हैं, वे परमात्मा के प्रतिनिधि नहीं हो सकते।’ Learn More
  8. भारत में राष्ट्र

    भारत में राष्ट्र

    Rs30.00

    1.जीवन पद्घति का नाम धर्म है और धर्म का सार है कि जो व्यवहार अपने साथ किया जाना पसन्द नहीं करते वह किसी के साथ न करो। Learn More
  9. भारतवर्ष का संक्षिप्त इतिहास

    भारतवर्ष का संक्षिप्त इतिहास

    Rs150.00

    रथम उपन्यास ‘‘स्वाधीनता के पथ पर’ से ही ख्याति की सीढ़ियों पर जो चढ़ने लगे कि फिर रुके नहीं। विज्ञान की पृष्ठभूमि पर वेद, उपनिषद् दर्शन इत्यादि शास्त्रों का अध्ययन आरम्भ किया तो उनको ज्ञान का अथाह सागर देख उसी में रम गये। वेद, उपनिषद् तथा दर्शन शास्त्रों की विवेचना एवं अध्ययन अत्यन्त सरल भाषा में प्रस्तुत कराना गुरुदत्त की ही विशेषता है। Learn More
  10. भूल

    भूल

    Rs50.00

    स्त्री, समाज में नये आने वाले सदस्यों की जननी है। स्त्री उनको समाज की उपयोगी अंग बनाने की प्रथम शिक्षिका है। वह समाज में सुख शान्ति का सृजन करती है। Learn More

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