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Gurudutt

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  1. खण्ड 9 - प्रभातवेला, कुमार सम्भव, उमड़ती घटाएं (पौराणिक उपन्यास)

    खण्ड 9 - प्रभातवेला, कुमार सम्भव, उमड़ती घटाएं (पौराणिक उपन्यास)

    Rs300.00

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  2. अग्नि परीक्षा (राम कथा-3)

    अग्नि परीक्षा (राम कथा-3)

    Rs35.00

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  3. Amanat

    Amanat

    Rs300.00

    Hindi Novel Learn More
  4. परम्परा

    परम्परा

    Rs70.00

    भगवान श्रीराम के जीवन की कुछ घटनाओं को आधार बनाकर यह उपन्यास लिखा गया है। वैसे तो श्री राम के जीवन पर सैकड़ों ही नहीं, सहस्रों रचनाएं लिखी जा चुकी हैं, इस पर भी जैसा कि कहते हैं- Learn More
  5. श्रीमढ्भगवढ्गीता (अध्ययन)

    श्रीमढ्भगवढ्गीता (अध्ययन)

    Rs250.00

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  6. गंगा की धारा

    गंगा की धारा

    Rs600.00

    हमारी यह मान्यता रही है कि उपन्यास-सम्राट् स्व० श्री गुरुदत्त कालातीत साहित्य के स्रष्टा थे। साहित्य का, विशेषतया उपन्यास साहित्य का, सबसे बड़ा समालोचन समय होता है। सामान्यता यह देखने में आता है कि अधिकांश उपन्यासकारों का गौरव अल्पकालीन होता है इसका मुख्य कारण होता है उसकी रचना की महत्ता का अल्पकाल में प्रभावशून्य हो जाना। वास्तव में वह रचनाकार ही गौरवशाली माना जाता है जिसकी रचना साहित्य की स्थायी सम्पत्ति बन जाती है। इसकी यथार्थ परीक्षा काल ही करता है। स्व० श्री गुरुदत्त उन रचनाकारों में से थे जिनकी कृतियाँ कालातीत हैं। उसका मुख्य कारण है उनकी रचनाओं का सोद्देश्य होना। क्योंकि उद्देश्य को काल की सीमा में नहीं बाँधा जा सकता है, अतः उसके आधार पर रचित साहित्य भी काल की सीमा में सीमित नहीं किया जा सकता। यदि लेखक किसी उद्देश्य विशेष को आधार बनाकर रचना नहीं करता है तो वह श्रेष्ठ लेखक नहीं कहा जा सकेगा। Learn More
  7. हिन्दुत्व की यात्रा

    हिन्दुत्व की यात्रा

    Rs50.00

    ‘हिन्दुत्व की यात्रा’ नाम से ही पुस्तक का प्रतिपाद्य विषय स्पष्ट हो जाता है। प्रस्तुत पुस्तक द्वारा विद्वान लेखक ने आदिकाल से आरम्भ कर अब तक के आर्य-हिन्दू की जीवन मीमांसा का विशद वर्णन किया है। न केवल इतना, अपितु उन्होंने तथाकथित पाश्चात्य पण्डितों ने भारतीय मानस-पुत्रों, उनकी धारणाओं एवं मान्यताओं का निवारण एवं निराकरण भी किया है जो आर्य-हिन्दू को यहां का मूल निवासी नहीं मानते। Learn More
  8. लुढ़कते पत्थर

    लुढ़कते पत्थर

    Rs100.00

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  9. मृगतृष्णा

    मृगतृष्णा

    Rs250.00

    व्यक्ति चाहे मूर्ख हो अथवा विद्वान, क्या यह संभव है सभी को एक सामान सुविधाए।? समाजवाद - समाज के निम्न वर्ग को यही स्वपन दिखता है जो असंभव है । वास्तव में यही मृगतृष्णा है। मूर्ख लोग इसी मृगतृष्णा के जाल में उलझे रहते हैं और तथा कथित समाजवादी गुलछर्रे उड़ाते रहते हैं। Learn More
  10. अपने पराये

    अपने पराये

    Rs65.00

    (1894 & 1989) शिक्षा : एम.एस.सी. प्रथम उपन्यास ‘स्वाधीनता के पथ पर’ से ही ख्याति की सीढ़ियों पर जो चढ़ने लगे कि फिर रुके नहीं। विज्ञान की पृष्ठभूमि पर वेद, उपनिषद्, दर्शन इत्यादि शास्त्रों का अध्ययन आरम्भ किया तो उनको ज्ञान का अथाह सागर देख उसी में रम गये। Learn More
  11. प्रवंचना

    प्रवंचना

    Rs90.00

    एक विख्यात कवि का कहना है Learn More
  12. तैतिरीय उपनिषद

    तैतिरीय उपनिषद

    Rs70.00

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  13. जमाना बदल गया - भाग 3

    जमाना बदल गया - भाग 3

    Rs150.00

    द्वितीय विश्व-व्यापी युद्ध का इतिहास लिखने वाले एक विज्ञ लेखक ने लिखा है कि वह युद्घ तो जीत लिया गया था, परन्तु शान्ति के मूल्य पर उसके शब्द हैं-‘We won war but lost peace’। उस लेखक ने इसका कारण भी बताया है। उसके कथन का अभिप्राय यह है कि मित्र-राष्ट्रों की सेनाओं ने और जनता ने तो अतुल साहस और शौर्य का प्रमाण दिया था, परन्तु युद्ध-संचालन करने वाले राजनीतिज्ञ भूल-पर-भूल करते रहे। उनकी भूलों ने हिटलर को हटाकर, उसके स्थान पर स्टालिन को स्थापित कर दिया। Learn More
  14. न्यायाधिकरण

    न्यायाधिकरण

    Rs70.00

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  15. Sarvmangla

    Sarvmangla

    Rs250.00

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