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Gurudutt

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  1. पत्रलता

    पत्रलता

    Rs150.00

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  2. धरती और धन

    धरती और धन

    Rs300.00

    धरती और धन- बिना परिश्रम धरती स्वयमेव धन उत्पन्न नहीं करती। इसी प्रकार बिना धरती (साधन) के परिश्रम मात्र धन उत्पन्न नहीं करता। Learn More
  3. अस्ताचल की ओर - भाग 1

    अस्ताचल की ओर - भाग 1

    Rs200.00

    पण्डित शिवकुमार को त्रिविष्टप की राजधानी में रहते हुए छत्तीस वर्ष व्यतीत हो चुके थे। वह अभी तक भी राजगुरु के पद पर आसीन था। यद्यपि जिस राजा ने उसको इस पद पर प्रतिष्ठित किया था उस राजा संजीवायन लामा का देहान्त हो चुका था। उसका देहान्त तो शिवकुमार के आने के दस वर्ष उपरान्त ही हो गया था। उस समय जो युवराज पद पर था वह इस समय राजा के पद पर आसीन हो राज्य कर रहा था। उसको राज्य करते हुए छब्बीस वर्ष हो गये थे। संजीवायन लामा ने तत्कालीन महामन्त्री त्रिभुवन थापा के पुत्र कीर्तिमान को युवराज पद पर प्रतिष्ठित किया था। वही इस समय त्रिविष्टप का राजा था। महामन्त्री त्रिभुवन का भी बहुत पहले देहान्त हो चुका था। Learn More
  4. सागर तरंग

    सागर तरंग

    Rs55.00

    प्रस्तुत पुस्तक में सरदार बल्लभभाई पटेल के व्यक्तित्व एवं विचारों का सजीव चित्रण प्रस्तुत किया गया है। भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन को वैचारिक एवं क्रियात्मक रूप में एक नई दिशा देने के कारण सरदार पटेल ने राजनीतिक इतिहास में एक गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त किया। वास्तव में वे आधुनिक भारत के शिल्पी थे। उनके कठोर व्यक्तित्व में विस्मार्क जैसी संगठन कुशलता, कौटिल्य जैसी राजनीति सत्ता तथा राष्ट्रीय एकता के प्रति अब्राहम लिंकन जैसी अटूट निष्ठा थी। जिस अदम्य उत्साह असीम शक्ति से उन्होंने नवजात गणराज्य की प्रारम्भिक कठिनाइयों का समाधान किया, उसके कारण विश्व के राजनीतिक मानचित्र में उन्होंने अमिट स्थान बना लिया। Learn More
  5. वेद मन्त्रों के देवता

    वेद मन्त्रों के देवता

    Rs100.00

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  6. जमाना बदल गया - भाग 1

    जमाना बदल गया - भाग 1

    Rs150.00

    एक कवि ने लिखा है : तू भी बदल फलक कि ज़माना बदल गया। वह कह रहा है कि हे भगवान् ! तू भी बदल। अर्थात् हमारे भाग्य को बदल, क्योंकि सब कुछ बदल गया है। Learn More
  7. इबलीस

    इबलीस

    Rs30.00

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  8. परिवर्तन

    परिवर्तन

    Rs20.00

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  9. Sakraj Jaidaman

    Sakraj Jaidaman

    Rs300.00

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  10. भाव और भावना

    भाव और भावना

    Rs75.00

    गुरुदत्त जी ने एक बार किसी गोष्ठी में कहा था-मैंने प्रत्येक समस्या को अपने लिये एक चुनौती माना है। ‘भाव और भावना’ उनके ऐसे संस्मरणों का संग्रह है। जिनसे उनके जीवन को दिशा मिली है। समस्याओं का विश्वलेषण कर उनका समाधान उन्होंने ढूंढ़ा है और अपना मार्ग प्रशस्त किया है। Learn More
  11. स्वाधीनता के पथ पर

    स्वाधीनता के पथ पर

    Rs150.00

    टन......टन......टन........टन........। मन्दिर का घण्टा बज रहा था। देवता की आरती समाप्त हो चुकी थी। लोग चरणामृत पान कर अपने-अपने घर जा रहे थे। श्रद्धा, भक्ति, नमृता और उत्साह में लोग आगे बढ़कर, दोनों हाथ जोड़, मस्तक नवा, देवता को नमस्कार करते और हाथ की अंजुली बना चरणामृत के लिए हाथ पसारते थे। पुजारी रंगे सिर, बड़ी चोटी को गाँठ दिये, केवल रामनामी ओढ़नी ओढे़, देवता के चरणों के निकट चौकी पर बैठा अरघे से चरणामृत बाँट रहा था। Learn More
  12. सायंस और वेद

    सायंस और वेद

    Rs60.00

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  13. जीवन ज्वार

    जीवन ज्वार

    Rs200.00

    जिस प्रकार समुद्र में ज्वार उठता है और कालान्तर में भाटा आता है। इस पर भी यह सागर के वश की बात नहीं है कि वह उठते ज्वार को भाटे में या भाटे को ज्वार में परिवर्तित कर सके। उसी प्रकार कामनाओं का ज्वार जब जीवों में उठता है तो उसका विरोध भी प्रायः असम्भव हो जाता है। हाँ, मनुष्य में इस ज्वार का विरोध करने की शक्ति है। जिस प्रकार मनुष्य सागर के ज्वार व भाटे को नौका में बैठ कर झेलने में सक्षम है, उसी तरह वह अपने आत्म-बल द्वारा कामनाओं को वश में करने में भी सक्षम है। Learn More
  14. खण्डहर बोल रहे हैं - भाग 3

    खण्डहर बोल रहे हैं - भाग 3

    Rs80.00

    ‘‘सब गधे इकट्ठे हे गये हैं।’’ शहंशाह अपनी रिश्ते में अम्मी, परन्तु मन से प्रेमिका और प्रत्यक्ष में बहन महताब बेगम को कह रहा था। शहंशाह अजमेर से अभी-अभी लौटा था और आगरा के शाही महल में पहुँचते ही महताब बेगम को बुला सामने बैठाकर बता रहा था। राजपूतों पर अपनी चतुराई से विजय की कहानी बताकर उसने प्रशंसा का उक्त वाक्य कहा था। Learn More
  15. विकृत छाया

    विकृत छाया

    Rs60.00

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