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Gurudutt

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  1. हिन्दू राष्ट्र

    हिन्दू राष्ट्र

    Rs50.00

    शाश्वत का अर्थ है सदा रहनेवाला, नित्य। जो नित्य है वह सबके लिए है। ज्ञान का मूल स्रोत परमात्मा है और परमात्मा का ज्ञान वेद ज्ञान है। यह ज्ञान का प्राणीमात्र के लिये है। जैसे एक वृक्ष, जिसका सम्बन्ध मूल से कट गया हो, शीघ्र ही सूखने तथा सड़ने लगता है, इसी प्रकार मानव समाज भी, मूल ज्ञान से विच्छिन्न हो सूख तथा सड़ रहा है। मानव-समाज मानवता-विहीन हो रहा है। Learn More
  2. वाम मार्ग

    वाम मार्ग

    Rs400.00

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  3. एक मुह दो हाथ

    एक मुह दो हाथ

    Rs250.00

    लेखक की मान्यता - ईश्वर की सर्वोत्तम कृति मानव, कर्म करने को स्वतंत्र। मानव के दो हाथ होते है एक मुह होता है , अतः वह अपनी आवश्यकता से दो गुणा कार्य कर सकता है , फिर क्यों वह सद्कर्म से हिचकिचाता है , यही विषय है इस पुस्तक का। ऐतिहासिक रचना Learn More
  4. प्रतिशोध

    प्रतिशोध

    Rs80.00

    दुनियादारी में साधारणतः और राजनीति में विशेष रूप से यह माना जाता है कि शत्रु मित्र होता है। इस मान्यता पर राज्य और सांसारिक जीव कार्य करते भी देखे जाते हैं। परन्तु क्या यह मान्यता ठीक है ? यही इस पुस्तक का विषय है। Learn More
  5. श्री राम

    श्री राम

    Rs50.00

    यह राम पर आधारित है। बिल्कुल नया है और अनूठा और लेखक हैं प्रसिद्ध कथाकार श्री गुरुदत्त। रावण कौन था ? राक्षस कौन थे ? राम को उनका वध क्यों करना पड़ा ? क्या केवल इसलिये कि रावण ने सीता का अपहरण किया था ? इस विषय पर एक अनुपम उपन्यास। Learn More
  6. वेद और वैदिक काल

    वेद और वैदिक काल

    Rs55.00

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  7. जमाना बदल गया - भाग 2

    जमाना बदल गया - भाग 2

    Rs150.00

    इस उपन्यास के प्रथम भाग की भूमिका में हमने संक्षिप्त रूप में यह बताने का यत्न किया था कि भारत की दासता का कारण एक ओर तो बौद्ध-जैन मीमांसा तथा दूसरी ओर नवीन वेदान्त है। जहाँ बौद्ध-जैन मतावलम्बी भारत के जन-मानस को वेदों से पृथक् करने के लिए यत्नशील रहे, वहाँ नवीन वेदान्तियों ने जन-मानस को वेदों से दूर तो नहीं किया, परन्तु वेदों को जन-मानस से दूर कर दिया। हमारा अभिप्राय यह है कि वेदों के स्थान पर उपनिषद और गीता को लाकर प्रतिष्ठित कर दिया। यह एक विडम्बना-सी प्रतीत होती है कि स्वामी शंकराचार्यजी ने अपने प्रस्थानत्रयी के भाष्य में अनेक स्थलों पर वेद-संहिताओं को कर्मकाण्ड की पुस्तकें कह कर उन्हें केवल अज्ञानियों के लिए स्वर्गारोहण के निमित्त बताया है। परन्तु किसी भी स्थल पर संहिताओं का प्रमाण नहीं दिया। एक ढंग से चारों वेदों को, जिनका नव-संकलन श्रीकृष्ण द्वैपायन व्यासजी ने किया था, उन्होंने अनादर की वस्तु बना कर केवल उपनिषदों को ही परम ज्ञान की वस्तु सिद्ध करने का ही प्रयास किया है। Learn More
  8. कला  Currently Under Print

    कला Currently Under Print

    Rs0.00

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  9. Bhagnash

    Bhagnash

    Rs350.00

    Hindi Learn More
  10. अस्ताचल की ओर - भाग 2

    अस्ताचल की ओर - भाग 2

    Rs150.00

    हिमालय की सुरम्य घाटी में मार्तण्ड नामक बस्ती में मार्तण्ड भवन के कुछ अन्तर पर नदी के किनारे एक पक्की कुटिया है। कुटिया के बाहर चबूतरे पर मृगचर्म पर पालथी मारे पण्डित शिवकुमार विराजमान थे। सूर्योदय का समय था, पण्डित शिवकुमार सूर्याभिमुख ध्यानस्थ बैठे थे और उदीयमान सूर्य की किरणें उनकी मुख छवि को द्योतित कर रही थीं। Learn More
  11. भगवान भरोसे Currently Under Print

    भगवान भरोसे Currently Under Print

    Rs0.00

    अमर लेखक श्री गुरुदत्त की एक सशक्त कृति पाठकों के लिए प्रस्तुत है। एक सफल लेखक समाज में हो रहे परिवर्तनों को न केवल अपने पात्रों के माध्यम से अत्यन्त रोचक तथा मनोरंजक ढंग से दर्शाता है, साथ ही नित्य उत्पन्न होने वाली नई समस्याओं का समाधान भी प्रस्तुत करता है। कुछ वास्तविक घटनाओं को काल्पनिक पात्रों में गूँथ कर एक रोचक उपन्यास पाठकों के समक्ष रखना सिद्ध करता है श्री गुरुदत्त एक सर्वकालीन लेखक हैं। Learn More
  12. स्वराज्य दान

    स्वराज्य दान

    Rs150.00

    ‘‘भूल जाना मनुष्यता की बात नहीं। मनुष्यों में और अन्य प्राणियों में स्मरण-शक्ति का ही अन्तर है। मनुष्य तो उन्नति कर रहा है किन्तु अन्य प्राणी उन्नति नहीं कर रहे हैं। इसका कारण स्मरण-शक्ति ही है। पूर्व अनुभवों का मनन करके ही Learn More
  13. अद्वैत मीमांसा

    अद्वैत मीमांसा

    Rs60.00

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  14. कामना

    कामना

    Rs100.00

    भारतवर्ष की पवित्र व पावन-भूमि पर जन्म लेकर अनेकों साहित्यकारों ने यश व प्रसिद्धि की सीढ़ियां चढ़ीं। और पूरे विश्व में भारत के यश व गौरव को आलोकित किया। Learn More
  15. प्रारब्ध और पुरुषार्थ

    प्रारब्ध और पुरुषार्थ

    Rs80.00

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