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Search results for 'विन और विन'

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  1. मदनलाल ढींगरा और ऊधमसिंह-लंदन में गोली बनारसी सिंह

    मदनलाल ढींगरा और ऊधमसिंह-लंदन में गोली बनारसी सिंह

    Rs50.00

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  2. धर्मवीर हकीकत राय

    धर्मवीर हकीकत राय

    Rs40.00

    क्या आज का ‘‘नपुंसक’’ हिन्दू नाबालिग हकीकत की निर्मम हत्या से कुछ पाठ सीखेगा ? आज का हिन्दू नपुंसकता की पराकाष्ठा पर पहुँच चुका है किंतु उसको ‘क्लैब्यं मा स्म गमः’ कहकर उसके अस्तित्व और अस्मिता को जागृत करनेवाले ब्राह्मणों तथा दायित्वों को भी आज साँप सूँघ गया है। कौन है इसका दोषी ? कौन है इसका अपराधी ? और कौन इस दोष और अपराध का निराकरण करने वाला ? सुप्रसिद्ध लेखक श्री गुरुदत्त की विचारोत्तेजक तथा प्रेरणा देने वाली रचना। Learn More
  3. भाव और भावना

    भाव और भावना

    Rs75.00

    गुरुदत्त जी ने एक बार किसी गोष्ठी में कहा था-मैंने प्रत्येक समस्या को अपने लिये एक चुनौती माना है। ‘भाव और भावना’ उनके ऐसे संस्मरणों का संग्रह है। जिनसे उनके जीवन को दिशा मिली है। समस्याओं का विश्वलेषण कर उनका समाधान उन्होंने ढूंढ़ा है और अपना मार्ग प्रशस्त किया है। Learn More
  4. वीर पूजा

    वीर पूजा

    Rs50.00

    वीर पुरुषों के बलिदान की कहानी सदा से प्रेरणा का स्त्रोत रही है। मैजिनीगैरीबाल्डी आदि नरपुंगवों की वीर गाथाएँ आज भी विश्व मानव की दमनियों में ऊष्ण रक्त का संचार कर उसे उद्घेलित और उत्साहित करती रहती हैं। यही स्थिति भारतीय क्रान्तिवीरों और बलिदानियों की है। इसी उद्देश्य को सम्मुख रखकर प्रस्तुत पुस्तक का प्रणयन किया गया है। Learn More
  5. भाग्य चक्र

    भाग्य चक्र

    Rs75.00

    जनवरी सन् 2000 में प्रकाशित ‘‘भाव और भावना’’ में श्री गुरुदत्त जी ने मुख्य-मुख्य राजनीतिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन घटनाओं का अपने मन पर प्रभाव तथा प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन घटनाओं ने किस प्रकार उन्हें राजनीतिक शिक्षा दी तथा किस प्रकार उनके जीवन को एक कर्मयोगी का जीवन बनाया, संस्मरणात्मक शैली में श्री गुरुदत्त जी ने स्पष्ट किया था। Learn More
  6. Antim Yatra

    अन्तिम यात्रा

    Rs30.00

    इस पुस्तक के लेखक श्री वैद्य गुरुदत्त जम्मू-कश्मीर आन्दोलन में डॉ.श्यामाप्रसाद मुखर्जी के साथ दो बार जेल भेजे गए थे। पहली बार जब डॉ.साहब, श्री निर्मलचन्द्र चटर्जी (प्रधान, हिन्दू महासभा), श्री नन्दलाल जी शास्त्री (मंत्री रामराज्य परिषद्) तथा आठ अन्य व्यक्तियों के साथ 6 मार्च 1953 को पकड़े गए तो वैद्यजी भी उनके साथ थे। Learn More

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