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जगत की रचना

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Rs30.00
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Book Pages 79
Publish Date January 01,2001
Author Name Gurudutt
Book Id 5434

Details

प्राचीन काल के ऋषि-महर्षि योग-ध्यान से तथा अपनी तपस्या से और वर्तमान युग के वैज्ञानिक इलैक्ट्रानिक दूरबीन, क्षुद्रबीन, फोटोग्राफी, राकेट, द्युलोक में घूमने वाले यानों तथा अनेकानेक उपकरणों की सहायता से जगत के विषय में उक्त व अन्य अनेक संबन्धित विषयों पर खोज करते रहे हैं। इस पर भी, इनका ठीक-ठीक, अपने को भी सन्तोषदायक, उत्तर प्राप्त नहीं कर सके।

जगत की रचना

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Quick Overview

यह जगत एक अत्यन्त आश्चर्यमय, विस्मयजनक और रहस्ययुक्त घटना है। यह कितना बड़ा है, इसमें क्या-क्या पदार्थ हैं, वे पदार्थ कहां कहां है, कैसे बने वे, और कब बने और फिर क्यों बने ? इनका लाभ किसको है, कितना है और कैसे होता है ? ये कुछ प्रश्न हैं, जो आदिकाल से लेकर आज तक के साधारण मनुष्यों तथा विद्वानों को चकित करते रहे हैं।
Book Pages 79
Publish Date January 01,2001
Author Name Gurudutt
Book Id 5434

Details

प्राचीन काल के ऋषि-महर्षि योग-ध्यान से तथा अपनी तपस्या से और वर्तमान युग के वैज्ञानिक इलैक्ट्रानिक दूरबीन, क्षुद्रबीन, फोटोग्राफी, राकेट, द्युलोक में घूमने वाले यानों तथा अनेकानेक उपकरणों की सहायता से जगत के विषय में उक्त व अन्य अनेक संबन्धित विषयों पर खोज करते रहे हैं। इस पर भी, इनका ठीक-ठीक, अपने को भी सन्तोषदायक, उत्तर प्राप्त नहीं कर सके।

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