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Hindi Literature

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  1. अस्ताचल की ओर

    अस्ताचल की ओर

    Rs500.00

    यह उपन्यास तीन भागों में हैं Learn More
  2. भारतवर्ष का संक्षिप्त इतिहास

    भारतवर्ष का संक्षिप्त इतिहास

    Rs150.00

    रथम उपन्यास ‘‘स्वाधीनता के पथ पर’ से ही ख्याति की सीढ़ियों पर जो चढ़ने लगे कि फिर रुके नहीं। विज्ञान की पृष्ठभूमि पर वेद, उपनिषद् दर्शन इत्यादि शास्त्रों का अध्ययन आरम्भ किया तो उनको ज्ञान का अथाह सागर देख उसी में रम गये। वेद, उपनिषद् तथा दर्शन शास्त्रों की विवेचना एवं अध्ययन अत्यन्त सरल भाषा में प्रस्तुत कराना गुरुदत्त की ही विशेषता है। Learn More
  3. दो लहरों की टक्कर

    दो लहरों की टक्कर

    Rs500.00

    यह उपन्यास दो भागों में हैं जिनका विवरण इस प्रकार है: Learn More
  4. गंगा की धारा

    गंगा की धारा

    Rs600.00

    हमारी यह मान्यता रही है कि उपन्यास-सम्राट् स्व० श्री गुरुदत्त कालातीत साहित्य के स्रष्टा थे। साहित्य का, विशेषतया उपन्यास साहित्य का, सबसे बड़ा समालोचन समय होता है। सामान्यता यह देखने में आता है कि अधिकांश उपन्यासकारों का गौरव अल्पकालीन होता है इसका मुख्य कारण होता है उसकी रचना की महत्ता का अल्पकाल में प्रभावशून्य हो जाना। वास्तव में वह रचनाकार ही गौरवशाली माना जाता है जिसकी रचना साहित्य की स्थायी सम्पत्ति बन जाती है। इसकी यथार्थ परीक्षा काल ही करता है। स्व० श्री गुरुदत्त उन रचनाकारों में से थे जिनकी कृतियाँ कालातीत हैं। उसका मुख्य कारण है उनकी रचनाओं का सोद्देश्य होना। क्योंकि उद्देश्य को काल की सीमा में नहीं बाँधा जा सकता है, अतः उसके आधार पर रचित साहित्य भी काल की सीमा में सीमित नहीं किया जा सकता। यदि लेखक किसी उद्देश्य विशेष को आधार बनाकर रचना नहीं करता है तो वह श्रेष्ठ लेखक नहीं कहा जा सकेगा। Learn More
  5. गुण्ठन

    गुण्ठन

    Rs100.00

    8 दिसम्बर 1894 को लाहौर (अब पाकिस्तान) में जन्मे श्री गुरुदत्त हिन्दी साहित्य के एक देदीप्यमान नक्षत्र थे। वह उपन्यास-जगत् के बेताज बादशाह थे। अपनी अनूठी साधना के बल पर उन्होंने लगभग दो सौ से अधिक उपन्यासों की रचना की और भारतीय संस्कृति का सरल एवं बोधगम्य भाषा में विवेचन किया। साहित्य के माध्मय से वेद-ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने का उनका प्रयास निस्सन्देह सराहनीय रहा है। Learn More
  6. जमाना बदल गया

    जमाना बदल गया

    Rs600.00

    यह उपन्यास चार भागों में हैं जिनका विवरण इस प्रकार है: Learn More
  7. जिन्दगी

    जिन्दगी

    Rs100.00

    8 दिसम्बर, 1894 को लाहौर (अब पाकिस्तान) में जन्में श्री गुरुदत्त हिन्दी साहित्य के एक देदीप्यमान नक्षत्र थे। वह उपन्यास-जगत् के बेताज बादशाह थे। अपनी अनूठी साधना के बल पर उन्होंने लगभग दो सौ से अधिक उपन्यासों की रचना की और भारतीय संस्कृति का सरल एवं बोधगम्य भाषा में विवेचन किया। साहित्य के माध्यम से वेद-ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने का उनका प्रयास निस्सन्देह सराहनीय रहा है।
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  8. खण्डहर बोल रहे हैं

    खण्डहर बोल रहे हैं

    Rs250.00

    यह उपन्यास तीन भागों में हैं जिनका विवरण इस प्रकार है: Learn More
  9. परित्राणाय साधूनाम्

    परित्राणाय साधूनाम्

    Rs700.00

    हिन्दुओं में यह किंवदन्ति प्रचलित है कि यदि महाभारत की कथा की जायेगी तो कथा समाप्त होने से पूर्व ही सुनने वालों में महाभारत मच जायेगा। मैं बाल्यकाल से इस किंवदन्ति को सुनता चला आया हूँ और इसका आधार जानने का यत्न करता रहा हूँ। Learn More
  10. वैशाली विलय

    वैशाली विलय

    Rs250.00

    तक्षशिला विश्वविद्यालय में वसंत महोत्सव मनाया जा रहा था। फाल्गुन सुदी पञ्चमी से यह उत्सव आरम्भ होकर दस दिन तक चला करता था। विश्वविद्यालय के विद्यार्थी-गण, अध्यापक-वर्ग और देश-विदेशों से आये हुए प्रतिष्ठित दर्शक इस महोत्सव में सरुचि भाग ले रहे थे। Learn More

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