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जमाना बदल गया - भाग 4

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Rs150.00
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Book Pages 520
Publish Date January 01,1981
Author Name Gurudutt
Book Id 5395

Details

कोई ऐसा पुरुष अथवा जातिभ्रष्ट, घाटे में अथवा मरती नहीं, जो अपने मन्तव्य को, कष्ट एवं क्लेश सह कर भी पालन करती है, जो यज्ञों (लोक कल्याण) के द्वारा अपने पुरुषार्थ को परमात्मा में अर्पण करती है। ऐसा पुरुष अथवा ऐसी जाति सत्य की रक्षा करती है, धर्म पुत्रों को उत्पन्न करती है और धन-धान्य से सम्पन्न होती है। सहस्रों वर्ष पूर्व ऋषि ने यह कहा था

जमाना बदल गया - भाग 4

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Quick Overview

इस उपन्यास को समाप्त करते हुए मुझे केवल इतना निवेदन करना ही शेष रहता है कि पूर्ण सौर-जगत में केवल पृथ्वी पर प्राण-सृष्टि का होना ही अभी तक पता चला है। चांद के विषय में तो बहुत कुछ चित्रित भी कर लिया गया है। कदाचित् कुछ ही वर्षों में मनुष्य वहां घूम भी आयगा। यह बात भी निश्चित ही है कि मनुष्य को वहां अपनी प्रतिलिपि नहीं मिलेगी।
Book Pages 520
Publish Date January 01,1981
Author Name Gurudutt
Book Id 5395

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कोई ऐसा पुरुष अथवा जातिभ्रष्ट, घाटे में अथवा मरती नहीं, जो अपने मन्तव्य को, कष्ट एवं क्लेश सह कर भी पालन करती है, जो यज्ञों (लोक कल्याण) के द्वारा अपने पुरुषार्थ को परमात्मा में अर्पण करती है। ऐसा पुरुष अथवा ऐसी जाति सत्य की रक्षा करती है, धर्म पुत्रों को उत्पन्न करती है और धन-धान्य से सम्पन्न होती है। सहस्रों वर्ष पूर्व ऋषि ने यह कहा था

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