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खण्डहर बोल रहे हैं - भाग 1

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Rs90.00
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Book Pages 356
Publish Date February 03,2004
Author Name Gurudutt
Book Id 5393

Details

जी ! तेरह गुजर चुकी हैं। चौदहवीं, पन्द्रहवीं और सोलहवीं अभी जीवित हैं। मेरे वालिद शरीफ अभी हैं। मेरी अपनी भी औलाद है। एक लड़का और एक लड़की।’’ ‘‘इसका मतलब यह हुआ कि इस मुगल खानदान की शुरुआत हुए साढ़े तीन सौ से ज्यादा साल हो गये हैं। तो क्या औरंगज़ेब का इससे किसी किस्म का ताल्लुक है ?’’ ‘‘औरंगज़ेब का हमारे खानदान से तो इतना ही ताल्लुक है कि वह हमारी बरबादी में वजह हुआ था। उसने हमारे बुजुर्ग की माँ को बहुत तंग किया था।’’ ‘‘तो ये सब बातें लिखी हैं उस किताब में ?’’

खण्डहर बोल रहे हैं - भाग 1

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Quick Overview

जब वे वहाँ से अजन्ता की ओर चले तो यात्री ने पुनः बात आरम्भ कर दी। उसने कहा, ‘‘मिरज़ा, तुमने कहा है कि मिरज़ा का लकब लिये आपकी पन्द्रह पीढ़ियाँ गुजर चुकी हैं।’’
Book Pages 356
Publish Date February 03,2004
Author Name Gurudutt
Book Id 5393

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जी ! तेरह गुजर चुकी हैं। चौदहवीं, पन्द्रहवीं और सोलहवीं अभी जीवित हैं। मेरे वालिद शरीफ अभी हैं। मेरी अपनी भी औलाद है। एक लड़का और एक लड़की।’’ ‘‘इसका मतलब यह हुआ कि इस मुगल खानदान की शुरुआत हुए साढ़े तीन सौ से ज्यादा साल हो गये हैं। तो क्या औरंगज़ेब का इससे किसी किस्म का ताल्लुक है ?’’ ‘‘औरंगज़ेब का हमारे खानदान से तो इतना ही ताल्लुक है कि वह हमारी बरबादी में वजह हुआ था। उसने हमारे बुजुर्ग की माँ को बहुत तंग किया था।’’ ‘‘तो ये सब बातें लिखी हैं उस किताब में ?’’

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