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खण्डहर बोल रहे हैं - भाग 2

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Book Pages 356
Publish Date 1-Jan-04
Author Name Gurudutt
Book Id 5544

Details

वहां ठहरने में अपनी नीति का वर्णन भी उसने अपने एक पत्र में शिवाजी को किया था। यह पत्र उसने ‘धरमत’ के युद्ध से पहले भेजा था। इस पत्र में उसने लिखा था, ‘‘महाराज मैं अपने विचार से, पूना के हिन्दू राज्य की नीति के संचालन में ही यहाँ ठहरा हुआ हूँ। औरंगजेब अपने पिता को जीवित पकड़कर बंदी बनाने के लिए आगरा जा रहा है। अपने पिता को बन्दी बनाकर वह स्वयं शहंशाह बनने का विचार कर रहा है। परन्तु उसके मार्ग में कठिनाइयाँ बहुत हैं। यद्यपि लोमड़ी की भाँति मक्कार होने से, वह अपने उद्देश्य में सफल होने की आशा करता है, परन्तु वह जानता है और मैं भी जानता हूँ कि कठिनाइयाँ हिमालय के समान बड़ी-बड़ी हैं। अतः उसने मुझे और आपको अपनी पराजय के समय सम्भावित ‘पनाह’ का स्थान स्वीकार कर ही मुझे अपनी बेगमों और बच्चों का संरक्षक बनाया है। मैं भी इसी आशा में यदि भारत में पुनः हिन्दू-साम्राज्य स्थापित होना है तो यह अवसर सहायक हो सकता है, यहाँ ठहरा हूँ।

खण्डहर बोल रहे हैं - भाग 2

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Quick Overview

विश्वनाथ पंत, औरंगज़ेब के आगरा पर आक्रमण के समय, उसके परिवार की रक्षा के लिए औरंगाबाद में लगभग एक वर्ष तक रहा था। यद्यपि वह अपने समाचार पूना भेजता रहा, इस पर भी वह स्वयं पूना आ नहीं सका था।
Book Pages 356
Publish Date 1-Jan-04
Author Name Gurudutt
Book Id 5544

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वहां ठहरने में अपनी नीति का वर्णन भी उसने अपने एक पत्र में शिवाजी को किया था। यह पत्र उसने ‘धरमत’ के युद्ध से पहले भेजा था। इस पत्र में उसने लिखा था, ‘‘महाराज मैं अपने विचार से, पूना के हिन्दू राज्य की नीति के संचालन में ही यहाँ ठहरा हुआ हूँ। औरंगजेब अपने पिता को जीवित पकड़कर बंदी बनाने के लिए आगरा जा रहा है। अपने पिता को बन्दी बनाकर वह स्वयं शहंशाह बनने का विचार कर रहा है। परन्तु उसके मार्ग में कठिनाइयाँ बहुत हैं। यद्यपि लोमड़ी की भाँति मक्कार होने से, वह अपने उद्देश्य में सफल होने की आशा करता है, परन्तु वह जानता है और मैं भी जानता हूँ कि कठिनाइयाँ हिमालय के समान बड़ी-बड़ी हैं। अतः उसने मुझे और आपको अपनी पराजय के समय सम्भावित ‘पनाह’ का स्थान स्वीकार कर ही मुझे अपनी बेगमों और बच्चों का संरक्षक बनाया है। मैं भी इसी आशा में यदि भारत में पुनः हिन्दू-साम्राज्य स्थापित होना है तो यह अवसर सहायक हो सकता है, यहाँ ठहरा हूँ।

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