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खण्डहर बोल रहे हैं - भाग 3

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Book Pages 356
Publish Date 1-Jan-04
Author Name Gurudutt
Book Id 5545

Details

‘‘भैया ! महताब ने पूछा, ‘‘इन गधों में तुम किन-किन को शामिल करते हो ?’’ ‘‘सबसे बड़ा गधा अकबर है। वह समझा था कि वह अपने बाप से भी ज़्यादा अक्लमन्द हो गया है। वह कल का छोकरा अपने बाप आलमगीर की ज़िन्दगी के हालात को बिना जाने उससे दुश्मनी करने चल पड़ा है।’’ ‘‘तो भैया ! क्या अपने बेटे को मरवा डाला है ?’’ ‘‘मरवा ? नहीं बेगम। मुझे उस पर रहम आ गया था।’’

खण्डहर बोल रहे हैं - भाग 3

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Quick Overview

‘‘सब गधे इकट्ठे हे गये हैं।’’ शहंशाह अपनी रिश्ते में अम्मी, परन्तु मन से प्रेमिका और प्रत्यक्ष में बहन महताब बेगम को कह रहा था। शहंशाह अजमेर से अभी-अभी लौटा था और आगरा के शाही महल में पहुँचते ही महताब बेगम को बुला सामने बैठाकर बता रहा था। राजपूतों पर अपनी चतुराई से विजय की कहानी बताकर उसने प्रशंसा का उक्त वाक्य कहा था।
Book Pages 356
Publish Date 1-Jan-04
Author Name Gurudutt
Book Id 5545

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‘‘भैया ! महताब ने पूछा, ‘‘इन गधों में तुम किन-किन को शामिल करते हो ?’’ ‘‘सबसे बड़ा गधा अकबर है। वह समझा था कि वह अपने बाप से भी ज़्यादा अक्लमन्द हो गया है। वह कल का छोकरा अपने बाप आलमगीर की ज़िन्दगी के हालात को बिना जाने उससे दुश्मनी करने चल पड़ा है।’’ ‘‘तो भैया ! क्या अपने बेटे को मरवा डाला है ?’’ ‘‘मरवा ? नहीं बेगम। मुझे उस पर रहम आ गया था।’’

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