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मैं न मानूँ

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Book Pages 119
Publish Date January 01,1993
Author Name Gurudutt
Book Id 5379

Details

पंजाब यूनिवर्सिटी की मैट्रिक की परीक्षा हो रही थी। लाहौर मॉडल स्कूल में भी एक-परीक्षा केन्द्र था। उस दिन का प्रथम-परीक्षा-पत्र देकर लड़के स्कूल के हॉल से बाहर निकले तो भगवानदास भी बाहर आया और लड़कों में दृष्टि दौड़ा किसी को ढूँढ़ने लगा। प्रायः सभी लड़के परस्पर अपने प्रश्नों के उत्तर मिला रहे थे। भगवानदास की दृष्टि सबसे पृथक खड़े एक लड़के पर पड़ी। वह उसी ओर चल पड़ा। मार्ग में एक अन्य लड़के ने पूछा, ‘‘भगवान ! दूसरे सवाल का क्या जवाब है ?’’

मैं न मानूँ

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Quick Overview

अभिमानी का सिर नीचा होता है, परंतु इस संसार में ऐसे लोग भी हैं जो सिर नीचा होने पर भी, उसको नीचा नहीं मानते। ऐसे लोगों के लिए ही कहावत बनी है—‘रस्सी जल गई, पर बल नहीं टूटे’।
इसका कारण मनुष्य की आद्योपांत विवेक-शून्यता है। विवेक अपने चारों ओर घटने वाली घटनाओं के ठीक मूल्यांकन का नाम है।
Book Pages 119
Publish Date January 01,1993
Author Name Gurudutt
Book Id 5379

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पंजाब यूनिवर्सिटी की मैट्रिक की परीक्षा हो रही थी। लाहौर मॉडल स्कूल में भी एक-परीक्षा केन्द्र था। उस दिन का प्रथम-परीक्षा-पत्र देकर लड़के स्कूल के हॉल से बाहर निकले तो भगवानदास भी बाहर आया और लड़कों में दृष्टि दौड़ा किसी को ढूँढ़ने लगा। प्रायः सभी लड़के परस्पर अपने प्रश्नों के उत्तर मिला रहे थे। भगवानदास की दृष्टि सबसे पृथक खड़े एक लड़के पर पड़ी। वह उसी ओर चल पड़ा। मार्ग में एक अन्य लड़के ने पूछा, ‘‘भगवान ! दूसरे सवाल का क्या जवाब है ?’’

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