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मेघवाहन

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Book Pages 164
Publish Date 1-Jan-95
Author Name Gurudutt
Book Id 5296

Details

आज से 94 वर्ष पूर्व लाहौर (अब पाकिस्तान) के निम्न मध्यवर्गीय पंजाबी आरोड़ा परिवार में उनका जन्म हुआ था। बाल्यकाल से ही गुरुदत्त को लिखने-पढ़ने का चाव रहा। यही कारण है कि साधनहीन होने पर भी वे एम.एस-सी. की स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त कर सके। तदुपरान्त उनकी विद्यालयीन शिक्षा का भले ही अन्त हो गया हो किन्तु विद्यार्थी जीवन तो आज 94 वर्ष की आयु में भी निरन्तर उसी प्रकार चल रही है।

मेघवाहन

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Quick Overview

उपन्यासकार श्री गुरुदत्त जी का जीवन विगत 94 वर्षों से सतत साधनारत रहने के फलस्वरूप तपकर ऐसा कुन्दन बन गया है कि जिसकी तुलना अब किसी अन्य से नहीं अपितु उनसे ही की जा सकती है। ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार सागर और आकाश की तुलना किसी अन्य से नहीं अपितु सागर और आकाश से ही की जा सकती है। वर्षों पूर्व श्री गुरुदत्त जी के किसी अभिनन्दन समारोह में दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के भूतपूर्व अध्यक्ष डॉ. विजयेन्द्र स्नातक ने उनके प्रति अपने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा था—‘कोई भी उनको बैठे उनके दैदीप्यमान मुखाकृति को देखे तो यही अनुभव करेगा मानो मार्ग-निर्देशन करता हुआ-सा कोई तपस्वी बैठा है।’
Book Pages 164
Publish Date 1-Jan-95
Author Name Gurudutt
Book Id 5296

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आज से 94 वर्ष पूर्व लाहौर (अब पाकिस्तान) के निम्न मध्यवर्गीय पंजाबी आरोड़ा परिवार में उनका जन्म हुआ था। बाल्यकाल से ही गुरुदत्त को लिखने-पढ़ने का चाव रहा। यही कारण है कि साधनहीन होने पर भी वे एम.एस-सी. की स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त कर सके। तदुपरान्त उनकी विद्यालयीन शिक्षा का भले ही अन्त हो गया हो किन्तु विद्यार्थी जीवन तो आज 94 वर्ष की आयु में भी निरन्तर उसी प्रकार चल रही है।

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