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- मेघवाहन
- उपन्यासकार श्री गुरुदत्त जी का जीवन विगत 94 वर्षों से सतत साधनारत रहने के फलस्वरूप तपकर ऐसा कुन्दन बन गया है कि जिसकी तुलना अब किसी अन्य से नहीं अपितु…
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- मैं हिन्दू हूँ
- प्रथम उपन्यास ‘‘स्वाधीनता के पथ पर’’ से ही ख्याति की सीढ़ियों पर जो चढ़ने लगे कि फिर रुके नहीं। विज्ञान की पृष्ठभूमि पर वेद, उपनिषद दर्शन इत्यादि शास्त्रों का अध्ययन…
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- यजुर्वेद और गृहस्थ धर्म
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- यह संसार
- प्रथम उपन्यास ‘स्वाधीनता के पथ पर’ से ही ख्याति की सीढ़ियों पर जो चढ़ने लगे कि फिर रुके नहीं। विज्ञान की पृष्ठभूमि पर वेद, उपनिषद् दर्शन इत्यादि शास्त्रों का अध्ययन…
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- ₹80.00
- यात्रा का अंत
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- ₹400.00
- युद्ध और शान्ति
- भारतीय समाज-शास्त्र में समाज को चार वर्गों में विभक्ति किया गया है। यह विभाजन ईश्वरीय है।
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- राष्ट्र्र राज्य और संविधान
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- लालसा
- राजा बहादुर की आज्ञा आयी कि भगवती लखनऊ से आने वाली गाड़ी से आ रहे मेहमानों को लाने के लिए स्टेशन पर पहुँच जाये। आज्ञा लाने वाला राजा बहादुर का…
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- लुढ़कते पत्थर
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- ₹300.00
- लुढ़कते पत्थर
- स्वर्गीय श्री गुरुदत्त ने सामाजिक, सांस्कृतिक पारिवारिक उपन्यासों के साथ-साथ ऐतिहासिक उपन्यासों की भी रचना की है। इतिहास और ऐतिहासिक उपन्यास, के अन्तर को स्वयं श्री गुरुदत्त भली-भाँति जानते और…
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- लेखन पर अन्य लेखकों,विचारकों एवं परिचितों के विचार
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- लोक परलोक
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