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- ₹2,200.00
- जमाना बदल गया
- यह उपन्यास चार भागों में हैं जिनका विवरण इस प्रकार है: भगवान् हमारे भाग्य को बदलेगा अथवा नहीं, पता नहीं, परन्तु ज़माना तो बदल ही रहा है। क्यों ? इसलिए…
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- ₹550.00
- जमाना बदल गया – भाग 1
- एक कवि ने लिखा है : तू भी बदल फलक कि ज़माना बदल गया। वह कह रहा है कि हे भगवान् ! तू भी बदल। अर्थात् हमारे भाग्य को बदल,…
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- ₹200.00
- जिन्दगी
- 8 दिसम्बर, 1894 को लाहौर (अब पाकिस्तान) में जन्में श्री गुरुदत्त हिन्दी साहित्य के एक देदीप्यमान नक्षत्र थे। वह उपन्यास-जगत् के बेताज बादशाह थे। अपनी अनूठी साधना के बल पर…
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- ₹200.00
- जीवन ज्वार
- जिस प्रकार समुद्र में ज्वार उठता है और कालान्तर में भाटा आता है। इस पर भी यह सागर के वश की बात नहीं है कि वह उठते ज्वार को भाटे…
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- ₹100.00
- तैतिरीय उपनिषद
- तैतिरीय उपनिषद
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- ₹150.00
- दासता के नये रूप
- ‘दासता के नये रूप’ में उपन्यासकार ने स्वातन्त्र्योपलब्धि के अनन्तर देशवासियों की दास मनोवृत्ति और पतित आचरण का विश्लेषण किया है। इस दिशा में उनकी यह अत्यन्त सफल अभिव्यक्ति कही…
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- ₹300.00
- दिग्विजय
- स्वामी शंकराचार्य ने अपने मात्र 33 वर्ष के जीवन में इस देश में जो भी सांस्कृतिक पुनरुत्थान किया, उसकी व्याख्या ही ‘दिग्विजय’ उपन्यास की विषयवस्तु है। तदपि यह स्वामी शंकराचार्य…
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- ₹250.00
- देश की हत्या
- उपन्यासकार गुरुदत्त का जन्म जिस काल और जिस प्रदेश में हुआ उस काल में भारत के राजनीतिक क्षितिज पर बहुत कुछ विचित्र घटनाएँ घटित होती रही हैं। गुरुदत्त जी इसके…
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- ₹200.00
- दो भद्र पुरुष
- एक लखपति था और दूसरा मजदूर। एक ठेकेदार था, दूसरा स्कूल-मास्टर। एक नई दिल्ली में बारहखम्भा रोड पर दुमंजिली कोठी पर रहता था, दूसरा बाजार सीताराम के कूचा पातीराम की…
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- ₹1,200.00
- दो लहरों की टक्कर
- यह उपन्यास दो भागों में हैं जिनका विवरण इस प्रकार है:
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- ₹40.00
- द्वितीय विश्वयुद्ध
- द्वितीय विश्व युद्ध की कहानी वास्तव में एडोल्फ हिटलर की कहानी ही कहनी चाहिए। एडोल्फ हिटलर की मानसिक अवस्था की जन्मदाता जर्मन जाति की मानसिक अवस्था है।
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- ₹300.00
- धरती और धन
- धरती और धन- बिना परिश्रम धरती स्वयमेव धन उत्पन्न नहीं करती। इसी प्रकार बिना धरती (साधन) के परिश्रम मात्र धन उत्पन्न नहीं करता।
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